परोपकार का महत्व | Stories In Hindi With Moral

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परोपकार का महत्व

Stories in hindi with moral:बहुत समय पहले की बात है. मंगत नाम का एक जमींदार किसी गांव में रहता था. वह स्वभाव से बहुत ही दयालु था. उसे दूसरों की मदद करना बहुत अच्छा लगता था. उसके पास एक घोडा गाड़ी थी, जिसका इस्तेमाल लगभग गांव वाले करते थे. उन दिनों गांव में कोई वैद्य नहीं था जिसकी वजह से अगर कोई बीमार पद जाता तो उसे शहर में जाकर इलाज करना पड़ता था. इस लिए गांव वालों को मंगत के घोड़ागाड़ी की जरुरत हमेशा पड़ती थी. जब भी कोई गांव वाला घोडेगाडी की सहायता मांगता तो मंगत निस्संकोच उन्हें देता था।  इससे गांव वाले मंगत तो काफी पसंद करते थे.

धीरे धीरे मंगत की भी उम्र हो आयी और अपने जीवन के अंतिम समय पर अपने बेटे चन्दन को बुलाया. उसने कहा की जब भी कोई व्यक्ति तुमसे सहायता मांगे तो उसकी मदद जरूर करना. चन्दन ने  अपने पिता को वचन दिया. कुछ दिनों बाद मंगत की मृत्यु हो गयी. समय बीतता गया. चन्दन अपने पिता को दिए वचन को निभा नहीं पा रहा था. जब भी कोई गांव का व्यक्ति घोडेगाडी की सहायता मांगता तो चन्दन उन्हें बुरा कहकर भगा देता.

एक बार एक व्यक्ति की बेटी बहुत बीमार थी. उसे चिकित्सा की शीघ्र आवश्यकता थी. उसने चन्दन से घोडेगाडी की सहायता मांगी लेकिन हमेशा की तरह उसने बुरा कहकर सहायता करने से इंकार कर दिया. समय पर सहायता न मिलने के कारण उसकी बेटी ने दम तोड़ दिया. इससे वह व्यक्ति काफी नाराज हुआ और चन्दन को सबक सीखने की ठानी. उसने अपनी बेटी के शव को वहीँ छोड़कर दंडाधिकारी के पास गया और कहा की हुजूर चन्दन ने मेरी बेटी को काम देने के लिए बुलाया। इसने काम तो करवा लिया मगर मजदूरी देने से इंकार कर दिया. मजदूरी मांगने पर चन्दन ने उसे इतना मारा की उसकी मृत्यु हो गयी.

चुकी चन्दन की हरकतों के बारे में दंडाधिकारी को पहले से पता था और वो उससे काफी नाराज भी था. लेकिन कोई वजह न होने के कारण उसे कुछ बोल नहीं पाता था. आज जब उसे मौका मिला तो उसे सबक सिखाने की निश्चय किया. दंडाधिकारी की पत्नी को जब इस बात का पता चला तो उसने पूछा की आप निर्दोष चन्दन को दंड क्यों देना चाहते हो. इस आदमी की बात तो मनगढंत लगती है. भला चन्दन इसकी लड़की की हत्या क्यों करेगा. भले ही चन्दन दुष्ट प्रवृति का आदमी हो लेकिन आप ये कभी न भूले की उसके पिता मंगत की वजह से हमारा बेटा आज जिन्दा है. जब हमारे बेटे को सर्प ने काटा था तो उसी ने समय पर आकर सहायता की थी.

इस बात पर दंडाधिकारी ने भी काफी विचार किया और उस व्यक्ति से कहा की बेहतर है तुम राजा के पास चले जाओ. वो व्यक्ति फिर राजा के पास वही कहानी सुनाया. राजा ने चन्दन के बारें में गांव वालों से पता किया तो किसी ने उसके बारे में अच्छा नहीं कहा. तब राजा ने चन्दन को फांसी की सज़ा सुनाई. अगले दिन चन्दन को फांसी होनी थी. पर उस दिन वधिक ने अश्वस्थ होने का बहाना बना दिया. इस तरह एक सप्ताह बीत गए लेकिन वधिक कुछ न कुछ बहाना बना देता.

इस बात पर राजा को संदेह हुआ और सच्चाई जानने वो भेष बदल वधिक के घर पहुंचा. वहां उसने वधिक की पत्नी को कहते सुना की इस तरह कब तक बहाना बनाकर महाराज को धोखा देते रहोगे. इस पर वधिक ने कहा की भले ही महाराज मुझे फँसी पर लटका दे, मगर मैं चन्दन को फँसी नहीं दे सकता. मुझे अब भी याद है जब बचपन में मैं बीमारी के कारन मौत से जूझ रहा था चन्दन के पिता ने ही मेरी सहायता की थी. और मैं बच पाया था. ऐसे पुण्यात्मा के बेटे को फांसी पर लटककर मैं पाप का भागी नहीं बनना चाहता. अब तुम्ही बताओ की ऐसे इंसान का पुत्र भला किसी की हत्या कैसे कर सकता है. मुझे लगता है की हमारे महाराज को निर्णय देने में कुछ गलती हुई है..

उनकी बात सुनकर राजा सोच में पड़ गया. उसने फिर से एक बार उस व्यक्ति को दरबार में बुलाकर गरजके पूछा, ईश्वर की शपथ लेकर सच सच बताओ की क्या चन्दन ने तुम्हारी बेटी की हत्या की है. इस बार व्यक्ति भयभीत हो गया और सच सच बता दिया. उसके बाद राजा ने चन्दन को मुक्त कर दिया और कहा की तुम्हारे स्वर्गवास पिता के कारण आज तुम बच पाए हो. तुम जीवित रहकर भी अपने आपको निर्दोष साबित न कर सके क्योंकि कोई भी व्यक्ति तुम्हारे पक्ष में नहीं. आज तुम जिन्दा हो तो केवल इसलिए क्योंकि तुम मंगत के पुत्र हो जिसने हमेशा दुसरो की सहायता की. इस घटना से सबक लो की हमेशा परोपकारी बनो, अपने स्वभाव को बदलो. इससे लोग तुम्हारे ऊपर बिश्वास करेंगे और तुम्हारा जीवन भी सुखी रहेगा. इसके बाद चन्दन को एहसास हो गया और उसने अपने आपको बदल दिया.

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