Moral Stories In Hindi | आलस का फल

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Moral Stories In Hindi

सोनू और मोनू नाम के दो भाई एक गाँव में रहते थे. वो बहुत ही आलसी थे. दिनभर सोते रहते थे. उनकी बहुत बड़ी खेत थी, मगर वो बिना काम किये हमेशा सोते रहते थे. इस बात से उनकी माँ बहुत परेशान रहती थी.

एक बार तो हद ही हो गयी. दोनों भाई खेत में काम करने के बहाने , खेत के पास एक आम के पेड़ के निचे लेटे हुए थे. अचानक से एक पका हुआ आम दोनों भाई के बिच में आकर गिर गया. लेकिन वो दोनों इतने आलसी थे , की किसी ने भी आम उठाने का कष्ट नहीं किया, और दोनों आम को देख रहे थे. तभी वहाँ से उस राज्य के मंत्री गुजर रहे थे, तो मोनू ने आवाज़ दी मंत्रीजी नमस्कार।  क्या आप हमारी एक मदद कर सकते है. मंत्री ने कहा कहो क्या बात है. उसने कहा की क्या आप ये आम मेरे हाथ में दे सकते है?

मंत्री ये सुन हैरान हो गया, और बोला  की ये क्या बचपना है. आम तो बिलकुल तुम्हारे पास है, फिर मेरी मदद की क्या आवश्यकता। ये सुन सोनू बोला , दरअसल मंत्रीजी इस आम को उठाने के लिए हमें उठना पड़ेगा और अपना हाथ आगे बढ़ाना पड़ेगा।  ये बहुत कष्ट वाला काम है. इसीलिए अगर आप उठाकर दे दोगे  तो हमें ये कष्ट करना नहीं पड़ेगा.

ये सुन मंत्री खीज उठा, और सीधा वहाँ से दोनों भाइयों के घर गया. वहाँ उनकी माँ से बात करने के बाद पता चला की वे दोनों कितने आलसी है, और उनकी माँ कितनी चिंतित है. इन्होने उनकी माँ को आश्वस्त किया और कहा की मैं सब ठीक कर दूंगा.

अगले दिन सोनू और मोनू के घर एक सिपाही आकर बोला , की आप दोनों को राजा ने बुलाना है. थोड़ी समय के लिए दोनों डर  गए, मगर उसके बाद दोनों साथ चल दिए. महल पहुंचे तो राजा ने कहा की तुम दोनों को एक काम करना है. महल के खजाने की रखवाली के लिए मैं तुम दोनों को नियुक्त करता हूँ. दोनों को खजाने के बाहर पहरेदारी करनी पड़ेगी. ध्यान रहे की आपको हमेशा चौकन्ना रहना पड़ेगा।

थोड़ी सी भी लापरवाही की तो कड़ी सजा सुनाई जाएगी. चुकी तुम दोनों थोड़े काम काम करते हो, इसीलिए तुमलोगो को सिर्फ ४ घंटे ही रहना है. दोनों भाई मान गए और पहरेदारी करने लग गए. लेकिन वो इतने आलसी थे की, उतना समय भी अपना काम न कर पाए और बिच में ही सो गए. नींद खुलने पर देखा की खजाने वाले घर का दरवाजा खुला हुआ है, और अंदर कुछ नहीं है. डर  के मारे दोनों काँप गए. राजा ने उन्हें बुलाकर बोलै, की तुम दोनों इतने बड़े आलसी हो की, थोड़े वक़्त तक भी ठीक से पहरेदारी नहीं कर सके. पूरा धन चोरी हो गया. मैं तुम दोनों को मौत  की सजा सुनाता हूँ. ये सुन दोनों राजा के पैरों में गिर पड़े, और क्षमा मांगने लगे. उन्होंने ये माना की अगर हम आलस के कारण सोये नहीं होते, तो ये चोरी न हुयी होती. आज से हम आलस कभी नहीं करेंगे. ये सुन राजा ने उन्हें क्षमा कर दिया. वास्तव में ये पूरा खेल मंत्री ने रचा था , ताकि  दोनों भाइयों को अपनी गलती का एहसास हो.

इस कहानी से हमें ये सबक मिलता है की, आलस कभी नहीं करना चाहिए. इसके कारण  बहुत साड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।

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